जुमे की पहली अज़ान के बाद खाना-पीना कैसा है?
जुमे की पहली अज़ान को दूसरी (अज़ान) का दर्जा दे दिया गया है, मुफ़्ती बिही क़ौल (जिस पर फ़तवा है) यही है, जैसा कि हिदाया, शामी और फ़तहुल क़दीर में है। लिहाज़ा पहली अज़ान के बाद जुमे के लिए सई (तैयारी और जाना) ज़रूरी है और हर वह अमल जो सई के मुनाफ़ी (ख़िलाफ़) हो वह बैअ (ख़रीद-फ़रोख़्त) के हुक्म में है। और ख़रीद-फ़रोख़्त मकरूह-ए-तहरीमी है, लिहाज़ा जो इसके हुक्म में होगा वह भी मकरूह-ए-तहरीमी होगा। (किताब: हबीबुल फ़तावा / जि: 2 / पृ: 97)