मुहक्कक मसाला

अगर किसी शख्स को नमाज़ के दौरान किसी रुक्न के अदा करने या अदा न करने में शक हो, और वह एक रुक्न अदा करने यानी तीन मर्तबा 'सुभान अल्लाह' पढ़ने के बराबर सोचता ही रहे, न क़िरात में मशग़ूल हो और न ज़िक्र व तस्बीह में, तो इस सूरत में उस पर सजदा सह्व वाजिब होगा, और अगर सोचने के दौरान नमाज़ भी पढ़ता रहा तो सजदा सह्व वाजिब नहीं होगा। (किताब: अहम मसाइल / पृष्ठ: 72)

बाज़ और डाली – अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने की एक प्रेरक कहानी
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बाज़ और डाली – अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने की एक प्रेरक कहानी

किसी ने एक बादशाह को तोहफ़े में शाहीन (बाज़) के दो बच्चे पेश किए। बादशाह ने दोनों को अपने शाहीनों के प्रशिक्षकों (ट्रेनर्स) के सुपुर्द कर दिया ताकि वे उन दोनों को ट्रेनिंग दें कि वे शिकार पर ले जाए जा सकें। एक महीने के बाद वह मुलाज़िम (कर्मचारी) बादशाह के पास हाज़िर हुआ और कहा कि एक शाहीन तो मुकम...

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