आंख में दवा डालना रोज़े के लिए क्यों मुफ़्सिद (रोज़ा तोड़ने वाला) नहीं?
रोज़े की हालत में सुरमा लगाना या आंख में दवा डालना मुफ़्सिद नहीं है; इसलिए कि आंख और हलक़ (गले) के दरमियान बराहे-रास्त (सीधा) कोई रास्ता नहीं है। और हलक़ में जो सुरमे या दवा का असर महसूस होता है, वह बारीक रगों के ज़रिए से है, और ऐसा असर रोज़े के लिए माने (बाधक) नहीं है। (किताब: किताबुन नवाज़िल / जि: 6 / पृ: 358)