मुहक्कक मसाला

आंख में दवा डालना रोज़े के लिए क्यों मुफ़्सिद (रोज़ा तोड़ने वाला) नहीं?

रोज़े की हालत में सुरमा लगाना या आंख में दवा डालना मुफ़्सिद नहीं है; इसलिए कि आंख और हलक़ (गले) के दरमियान बराहे-रास्त (सीधा) कोई रास्ता नहीं है। और हलक़ में जो सुरमे या दवा का असर महसूस होता है, वह बारीक रगों के ज़रिए से है, और ऐसा असर रोज़े के लिए माने (बाधक) नहीं है। (किताब: किताबुन नवाज़िल / जि: 6 / पृ: 358)

एक रात की कहानी (हातिम ताई और यतीम बच्चे की सख़ावत)
लेख

एक रात की कहानी (हातिम ताई और यतीम बच्चे की सख़ावत)

एक आदमी ने हातिम ताई से पूछा: "ऐ हातिम! क्या सख़ावत (उदारता) में कोई तुमसे आगे बढ़ा है?" हातिम ने जवाब दिया: "हाँ! कबीला-ए-तय का एक यतीम (अनाथ) बच्चा मुझसे ज़्यादा सखी निकला, जिसका किस्सा कुछ यूँ है कि सफर के दौरान मैं रात बिताने के लिए उसके घर गया। उसके पास कुल दस बकरियां थीं। उसने एक बकरी ज़ुबह की...

ट्रेंडिंग न्यूज़

सभी समाचार