मुहक्कक मसाला

रोज़े की हालत में क़ै (उल्टी) का हुक्म?

रोज़े की हालत में अगर ख़ुद-ब-ख़ुद क़ै हो जाए तो उससे रोज़ा नहीं टूटता, चाहे मुंह भर हो या उससे कम, और अगर जान-बूझकर रोज़ा याद होने की हालत में मसलन उंगली डालकर क़ै की तो मुंह भर करने की सूरत में बिल-इत्तेफ़ाक़ (सर्वसम्मति से) रोज़ा टूट जाएगा। और अगर मुंह भर से कम है तो इस बारे में इख़्तिलाफ़ (मतभेद) है, हज़रत इमाम मुहम्मद से ज़ाहिर-उर-रिवायह में मर्वी यह है कि रोज़ा टूट जाएगा, जबकि हज़रत इमाम अबू यूसुफ़ का क़ौल यह है कि रोज़ा नहीं टूटेगा। बाज़ फ़ुक़हा ने इमाम अबू यूसुफ़ के क़ौल को तरजीह दी है। लेकिन इमाम मुहम्मद के क़ौल में एहतियात ज़्यादा है। (किताबुल मसाइल 2/155-163) (किताब: किताबुन नवाज़िल / जि: 6 / पृ: 389)

जिंदगी का सारांश – मुफ्ती मोहम्मद तकी उस्मानी के 20 सुनहरे सिद्धांत
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जिंदगी का सारांश – मुफ्ती मोहम्मद तकी उस्मानी के 20 सुनहरे सिद्धांत

मोहतरम शैख-उल-इस्लाम मुफ्ती मोहम्मद तकी उस्मानी साहब से सवाल किया गया कि, "हज़रत, जिंदगी का सारांश (خلاصہ) क्या है?" हज़रत ने ये 20 नुक्ते (निकात) इर्शाद फरमाए: (1) हर हाल में अल्लाह का शुक्र अदा किया करो। (2) कोशिश करो कि पूरी जिंदगी में कोई तुम्हारी शिकायत किसी दूसरे इंसान से न करे; परवरदिगार...

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