मुहक्कक मसाला

दूसरे की तरफ़ से रोज़ा रखना?

कोई शख़्स दूसरे के क़ज़ा रोज़े अपनी तरफ़ से नहीं रख सकता; बल्कि जिस पर रोज़ा फ़र्ज़ है उसी पर अदायगी लाज़िम है; अलबत्ता अगर वह किसी बीमारी या बुढ़ापे की वजह से रोज़ा रखने से ऐसा माज़ूर (असमर्थ) हो जाए कि अब मरते दम तक रोज़ा रखने की ताक़त की कोई उम्मीद न हो, तो ऐसा शख़्स रोज़े के बदले में फ़िदया दे सकता है, जिसकी मिक़दार एक सदक़ा-ए-फ़ित्र के बराबर है। लेकिन उसकी जगह पर दूसरे शख़्स के रोज़ा रखने से उसका फ़र्ज़ रोज़ा अदा न होगा। (किताब: किताबुन नवाज़िल / जि: 6 / पृ: 398)

लेन-देन की सफ़ाई और आख़िरत का ख़ौफ़
लेख

लेन-देन की सफ़ाई और आख़िरत का ख़ौफ़

हज़रत वाला (रह.) की तरफ़ से अपने सारे मुरीदीन (शिष्यों) और मुतअल्लिक़ीन (परिचितों) को यह हिदायत थी कि जब कभी रेलवे में सफ़र करो, और तुम्हारा सामान उस मिक़दार (मात्रा) से ज़ायद (अधिक) हो जितना रेलवे ने तुम्हें मुफ़्त ले जाने की इजाज़त दी है, तो इस सूरत में अपने सामान का वज़न कराओ और ज़ायद सामान का कि...

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