मुहक्कक मसाला

अगर मसबूक इमाम के साथ सलाम फेर दे, फिर किसी दूसरे के कहने पर अपनी नमाज़ मुकम्मल करे, तो उसकी नमाज़ फ़ासिद हो जाएगी। हाँ, अगर सलाम फेरने के बाद याद आ गया (चाहे यह याद आना अपने बाज़ू में नमाज़ पढ़ने वाले को देखकर ही हो, फिर वह खड़ा हुआ), तो नमाज़ फ़ासिद नहीं होगी। (अहम मसाइल / जि.: 2 / पृष्ठ: 85)

फ़तह-ए-मक्का: रहमतुल-लिल-आलमीन ﷺ की दया और माफ़ी के ऐतिहासिक दृश्य
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फ़तह-ए-मक्का: रहमतुल-लिल-आलमीन ﷺ की दया और माफ़ी के ऐतिहासिक दृश्य

फ़तह-ए-मक्का (मक्का की विजय) के मौक़े पर जगह-जगह हुज़ूर रहमतुल लिल आलमीन ﷺ (सारे संसार के लिए दया होने) के जलवे नज़र आते हैं। बल्कि वास्तविकता यह है कि मक्का की विजय का सबसे बड़ा कारण ही वह घटना बनी जिसने आपके दर्दभरे और मानवता-प्रेमी दिल को तड़पा दिया था। सीरत-निगार (जीवनी लेखक) लिखते हैं: सन् ६...

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