अगर कोई शख़्स इमाम के रुकू से सिर उठाने से पहले-पहले एक लम्हा भी इमाम को रुकू में पा ले, भले ही यह लम्हा एक तस्बीह से कम हो, तो वह उस रकात को पाने वाला समझा जाएगा। अलबत्ता अगर इमाम रुकू से उठने की हालत में हो, और मुक़्तदी रुकू में जाने की हालत में हो, तो वह रकात को पाने वाला नहीं होगा, लिहाज़ा उसे रकात दोहराना लाज़िम होगा। (अहम मसाइल / जि.: 3 / पृष्ठ: 72)