कुछ लोग मय्यत (मृतक) को रात में दफन करने को बुरा मानते हैं, उनका यह खयाल (विचार) सही नहीं है। सही बात यह है कि मय्यत को रात में दफन करना बिना किसी कराहत (नापसंदीदगी) के जायज़ और दुरुस्त है। (अहम मसाइल / जि.: 6 / पृष्ठ: 110)
हज़रात-ए-सहाबा-ए-किराम (रज़ियल्लाहु अन्हुम) में कुछ मसलों पर मतभेद (इख़्तिलाफ़) रहा है; मगर एक-दूसरे के सम्मान (एहतराम) में कभी फ़र्क़ नहीं आया। कौन नहीं जानता कि ख़ून-ए-उस्मान (रज़ियल्लाहु अन्हु) के मसले पर सहाबा-ए-किराम में शदीद (गंभीर) मतभेद हुआ और इसकी वजह से जंग भी हुई; मगर क्या मजाल कि उनके इस...