कुछ लोग सलाम और मुसाफ़हा (हाथ मिलाने) के बाद अपने हाथों को अपने सीने पर फेरते हैं, जबकि मुसाफ़हा के बाद सीने पर हाथ फेरना न किसी हदीस में मज़कूर (ज़िक्र) है, और न ही फुक़हा-ए-किराम ने फ़िक़्ह की किताबों में इसका तज़किरा (ज़िक्र) किया है। यह महज़ एक रिवाज है, इसलिए इससे बचना चाहिए। (अहम मसाइल / जि.: 3 / पृष्ठ: 291)