मुहक्कक मसाला

कुछ लोग विशेष रूप से रमज़ान के आखिरी जुमे (अल-विदा) में नए कपड़े पहनते हैं, और यह मशहूर है कि आखिरी जुमे को जितने भी नए कपड़े पहन लो, उसका कोई हिसाब-किताब नहीं होगा। इसका जवाब यह है कि 'हातू बुरहानकुम इन कुनतुम सादिक़ीन' (यानी अगर तुम अपनी बात में सच्चे हो तो दलील पेश करो) (अहकाम-ए-एतिकाफ़ 66)।

ईसाई धर्म का सांस्कृतिक आक्रमण!!
लेख

ईसाई धर्म का सांस्कृतिक आक्रमण!!

जब तक ईसाई धर्म राजनीति से तालमेल में नहीं था, तब तक दुनिया की हर कौम (राष्ट्र) का अपना एक अलग पहनावा होता था। अब भी जहाँ-जहाँ ईसाई धर्म किसी कौम की राजनीति पर असरअंदाज़ नहीं हुआ है, वहाँ अब भी उस कौम का अपना एक विशिष्ट राष्ट्रीय पहनावा है। जिन देशों में ईसाई धर्म राजनीति के साथ मिलकर पहुँचा, वहा...

ट्रेंडिंग न्यूज़

सभी समाचार