मुहक्कक मसाला

अगर कोई व्यक्ति जुमे की नमाज़ के लिए ऐसे समय पर पहुँचा कि जुमे की नमाज़ खत्म हो चुकी हो, तो अगर किसी और मस्जिद में जुमे की नमाज़ मिल सकती हो तो वहाँ जाकर अदा करे, वरना ज़ोहर की नमाज़ पढ़े, क्योंकि जुमे की नमाज़ की कज़ा नहीं है। (अहम मसाइल / जि: 2 / पृ: 108)

मतभेदों के बावजूद बेमिसाल इत्तिहाद – क़ैसर-ए-रोम को एक ऐतिहासिक जवाब
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मतभेदों के बावजूद बेमिसाल इत्तिहाद – क़ैसर-ए-रोम को एक ऐतिहासिक जवाब

हज़रात-ए-सहाबा-ए-किराम (रज़ियल्लाहु अन्हुम) में कुछ मसलों पर मतभेद (इख़्तिलाफ़) रहा है; मगर एक-दूसरे के सम्मान (एहतराम) में कभी फ़र्क़ नहीं आया। कौन नहीं जानता कि ख़ून-ए-उस्मान (रज़ियल्लाहु अन्हु) के मसले पर सहाबा-ए-किराम में शदीद (गंभीर) मतभेद हुआ और इसकी वजह से जंग भी हुई; मगर क्या मजाल कि उनके इस...

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