अगर कोई व्यक्ति जुमे की नमाज़ के लिए ऐसे समय पर पहुँचा कि जुमे की नमाज़ खत्म हो चुकी हो, तो अगर किसी और मस्जिद में जुमे की नमाज़ मिल सकती हो तो वहाँ जाकर अदा करे, वरना ज़ोहर की नमाज़ पढ़े, क्योंकि जुमे की नमाज़ की कज़ा नहीं है। (अहम मसाइल / जि: 2 / पृ: 108)