मुहक्कक मसाला

कुछ लोग यह समझते हैं कि अगर इमाम मेहराब में खड़ा होकर नमाज़ पढ़ाए तो नमाज़ दुरुस्त नहीं होती, जबकि सही बात यह है कि नमाज़ दुरुस्त हो जाती है। अलबत्ता, इमाम का मेहराब में खड़ा होकर नमाज़ पढ़ाना मकरूह है, लेकिन जगह की तंगी और ज़रूरत की हालत में मेहराब में खड़े होकर नमाज़ पढ़ाने में कोई हर्ज नहीं है। (अहम मसाइल / जि: 4 / पृ: 62)

सच्चे प्रेम की परीक्षा और नबी ﷺ की आज्ञाकारिता
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सच्चे प्रेम की परीक्षा और नबी ﷺ की आज्ञाकारिता

मेरे बुख़ारी शरीफ़ के उस्ताद-ए-मोहतरम, साकिन-ए-बक़ी (बक़ी के निवासी), हज़रत अक़दस मौलाना इस्लाम-उल-हक़ साहब रहमतुल्लाह अलैह ने बुख़ारी शरीफ़ के दर्स (व्याख्यान) में एक क़ीमती बात बताई थी कि मोहब्बत का पता टकराव और मुक़ाबले के वक़्त चलता है। मिसाल के तौर पर, आप बज़ाहिर ऐसा महसूस कर रहे हैं कि मुझे अप...

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