कुछ लोग यह समझते हैं कि अगर इमाम मेहराब में खड़ा होकर नमाज़ पढ़ाए तो नमाज़ दुरुस्त नहीं होती, जबकि सही बात यह है कि नमाज़ दुरुस्त हो जाती है। अलबत्ता, इमाम का मेहराब में खड़ा होकर नमाज़ पढ़ाना मकरूह है, लेकिन जगह की तंगी और ज़रूरत की हालत में मेहराब में खड़े होकर नमाज़ पढ़ाने में कोई हर्ज नहीं है। (अहम मसाइल / जि: 4 / पृ: 62)