अगर कोई व्यक्ति बस से सफ़र कर रहा है, और नमाज़ का वक़्त हो जाए, और वक़्त-ए-अदा में गाड़ी रुकने की कोई सूरत न हो सके, तो मजबूरन जिस तरह भी नमाज़ पढ़ सके, पढ़ ले, मगर बस से उतरने के बाद इस नमाज़ को दोबारा पढ़ ले। (अहम मसाइल / जि: 7 / पृ: 78)
एक रियासत में एक बूढ़े शख़्स को रोटी चोरी करते हुए पकड़ा गया। इलाक़े के कुछ लोग उसे पकड़कर वक़्त के क़ाज़ी (जज) के पास ले गए। क़ाज़ी ने बूढ़े बाबा से काफ़ी सवाल किए, लेकिन बाबा ने कोई जवाब नहीं दिया।
आख़िरकार क़ाज़ी ने फ़ैसला इस तरह सुनाया:
"बाबा जी रोटी चोरी करने के जुर्म में एक दिरहम तंदूर के...