मकान और दुकान में क़ुरआनी आयात जैसे: 'हाज़ा मिन फ़ज़्लि रब्बी' वग़ैरह आवेज़ां करना (लटकाना) या लिखना मकरूह है, और अगर ऐसी जगह पर आवेज़ां करे जहाँ तस्वीरें हों या टीवी चलाया जाता हो, तो जायज़ नहीं है, क्योंकि इससे क़ुरआन की बे-हुर्मती होती है। (अहम मसाइल / जि: 2 / पृ: 251)