रकात पाने के लिए दौड़ना मना है, चाहे रुकूअ न मिले, इसलिए कि आप ﷺ का इरशाद है: जब नमाज़ के लिए जमाअत खड़ी हो तो तुम दौड़ते हुए न आओ, और इत्मिनान के साथ चलकर आओ, जितनी रकातें मिलें उनको पढ़ लो, और जो छूट जाएं उनको बाद में अदा कर लो। (अहम मसाइल / जि: 1 / पृ: 50)