मुहक्कक मसाला

अल्लामा शामी (रह.) 'साहिब-ए-हिल्या' के हवाले से नक़्ल करते हैं कि हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने मुबारक, इस्हाक़, इब्राहीम और सौरी (रह.) फ़रमाते हैं: मुस्तहब यह है कि इमाम रुकूअ और सज्दे में तस्बीहात पांच-पांच मर्तबा पढ़े, ताकि मुक़्तदी हज़रात तीन-तीन मर्तबा पढ़ सकें। लिहाज़ा अगर इमाम ने इसका ख़याल नहीं रखा, तो उसका यह अमल मकरूह होगा। (अहम मसाइल / जि: 5 / पृ: 88)

एक हैरतअंगेज़ दरयाफ़्त: चींटियों की वैज्ञानिक समझ
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एक हैरतअंगेज़ दरयाफ़्त: चींटियों की वैज्ञानिक समझ

परसों एक किताब पढ़ रहा था۔۔ इस दौरान एक छोटी सी मक्खी उड़ कर मेरी किताब पर आ बैठी۔۔۔ पहले तो मैंने उसको भगा देने की कोशिश की۔۔۔۔ लेकिन वह उड़-उड़ कर किताब पर वापस आ बैठती। यह देख कर मैं सोच में पड़ गया कि ख़ालिक़ (सृष्टिकर्ता) ने कैसी-कैसी मख़्लूक़ (जीव) पैदा फ़रमाई है। उनका साइज़ और हरकतें देख कर ब...

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