चूँकि मस्जिद के पंखे और ट्यूबलाइट नमाज़ के वक़्त इस्तेमाल करने के लिए लगाए गए हैं, इसलिए इन्हें दीगर (दूसरे) औक़ात (समय) में इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं है। अलबत्ता, अगर इन पंखों और ट्यूबलाइट देने वालों की तरफ़ से इसकी इजाज़त हो, और इस्तेमाल की वजह से बिजली के जो अख़राजात (खर्च) बढ़ जाते हैं, वे दे दिए जाएं, तो इसकी इजाज़त है। (अहम मसाइल / जि: 4 / पृ: 161)