मुहक्कक मसाला

चूँकि मस्जिद के पंखे और ट्यूबलाइट नमाज़ के वक़्त इस्तेमाल करने के लिए लगाए गए हैं, इसलिए इन्हें दीगर (दूसरे) औक़ात (समय) में इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं है। अलबत्ता, अगर इन पंखों और ट्यूबलाइट देने वालों की तरफ़ से इसकी इजाज़त हो, और इस्तेमाल की वजह से बिजली के जो अख़राजात (खर्च) बढ़ जाते हैं, वे दे दिए जाएं, तो इसकी इजाज़त है। (अहम मसाइल / जि: 4 / पृ: 161)

हजरत मौलाना अशरफ अली साहब थानवी खुद अपनी नजर में
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हजरत मौलाना अशरफ अली साहब थानवी खुद अपनी नजर में

हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ अली थानवी (रहमतुल्लाही अलैहि) से थाना भवन में तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बैअत (आध्यात्मिक दीक्षा) का अनुरोध किया, जिसके जवाब में आपने उन्हें अपना परिचय देते हुए लिखा: "मैं एक खुश्क (सरल/रूखा) तालिब-ए-इल्म (विद्यार्थी) हूँ। इस ज़माने में जिन चीज़ों को दरवेशी (सूफ़ीवाद...

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