अगर मसबूक (देर से नमाज़ में शामिल होने वाला) क़ादा-ए-ऊला (पहली बैठक) में इमाम के साथ नमाज़ में शरीक हुआ, और वह जैसे ही क़ादा में बैठा, इमाम तीसरी रकात के क़ियाम के लिए खड़ा हो गया, तो मसबूक अत्तहिय्यात पढ़कर क़ियाम करे। क्योंकि मसबूक पर इमाम के ताबे (पीछे) होकर तशह्हुद वाजिब हो चुकी है, अत्तहिय्यात पढ़े बग़ैर खड़े होना मकरूह-ए-तहरीमी है, लेकिन अगर कोई शख़्स खड़ा हो गया तो नमाज़ हो जाएगी। (अहम मसाइल / जि: 1 / पृ: 44)