जिन फ़र्ज़ नमाज़ों के बाद सुन्नत नहीं है, उसमें अगर इमाम तस्बीह के लिए बैठे तो दाईं तरफ़ मुँह करके या बाईं तरफ़ मुँह करके या बिल्कुल मुक़्तदी की तरफ़ करके तीनों तरह बैठने का इख़्तियार है, और हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से तीनों तरीक़े मरवी (रिवायत किए गए) हैं; अलबत्ता दाईं तरफ़ मुँह करके बैठना अफ़ज़ल और औला (बेहतर) है। (किताब-उन-नवाज़िल / जिल्द: 4 / पृष्ठ: 80)