मुहक्कक मसाला

जिन फ़र्ज़ नमाज़ों के बाद सुन्नत नहीं है, उसमें अगर इमाम तस्बीह के लिए बैठे तो दाईं तरफ़ मुँह करके या बाईं तरफ़ मुँह करके या बिल्कुल मुक़्तदी की तरफ़ करके तीनों तरह बैठने का इख़्तियार है, और हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से तीनों तरीक़े मरवी (रिवायत किए गए) हैं; अलबत्ता दाईं तरफ़ मुँह करके बैठना अफ़ज़ल और औला (बेहतर) है। (किताब-उन-नवाज़िल / जिल्द: 4 / पृष्ठ: 80)

वहदत-ए-दीन न कि वहदत-ए-अदयान (दीन की एकता, न कि धर्मों की एकता)
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वहदत-ए-दीन न कि वहदत-ए-अदयान (दीन की एकता, न कि धर्मों की एकता)

🖋 मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्लाह रहमानी - शम्अ-ए-फ़रोज़ां 🕯 अल्लाह तआला ने हर चीज़ के लिए एक रास्ता बनाया है, इसी रास्ते से उस चीज़ को हासिल करने में इंसान की भलाई है और इस रास्ते को छोड़ देने में और अपनी तरफ़ से नए रास्ते बनाने में इंसान की बर्बादी है। अल्लाह तआला ने ग़िज़ा (भोजन) को पेट तक पहुँचान...

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