असर के बाद मजलिस-ए-तिलावत में या किसी और मजलिस में जब क़ुरआन करीम की तिलावत की जा रही हो तो सामईन पर तिलावते क़ुरआन का सुनना वाजिब है, और तिलावते क़ुरआन के वक़्त हर ऐसा मुबाह काम भी ममनू व नाजायज़ है, जो तिलावत के समाअ (सुनने) में मख़िल हो, चे जाइके क़ुरआन की तिलावत के वक़्त दुनियावी बातें करना, और मोबाइल से गेम खेलना, क्योंकि फ़ि-नफ़्सिही ये दोनों बातें मस्जिद में ममनू हैं, और तिलावते क़ुरआन के समाअ में मख़िल होने की वजह से इसमें मज़ीद क़बाहत व शनाअत आ जाती है, इसलिए आम मुसल्लियों बाल-ख़ुसूस तलबा-ए-अज़ीज़ को इस तरह की बातों से एहतराज़ करना लाज़िम है। (अहम मसाइल / जि: 3 / पृ: 277)