बसा औक़ात बस या ट्रेन के ज़रिए सफ़र में कोई आदमी हमारे साथ सफ़र में होता है, उसकी मंज़िल आने पर वह उतरता है, और उसका कोई सामान वग़ैरह हमारे पास रह जाता है, और हम उसको न जानते हैं और न हमें उसका पता होता है, तो इस सामान का हुक्म यह है कि जब तक यह ख़्याल हो कि वह शख़्स सामान की तलाश में होगा, उस वक़्त तक उसे तलाश किया जाए, और जब मिलने से मायूसी हो जाए तो उसे सदक़ा कर दिया जाए, या ख़ुद मुस्तहिक़ हो तो उसे इस्तेमाल कर ले। (अहम मसाइल / जि: 4 / पृ: 186)