मुहक्कक मसाला

बसा औक़ात बस या ट्रेन के ज़रिए सफ़र में कोई आदमी हमारे साथ सफ़र में होता है, उसकी मंज़िल आने पर वह उतरता है, और उसका कोई सामान वग़ैरह हमारे पास रह जाता है, और हम उसको न जानते हैं और न हमें उसका पता होता है, तो इस सामान का हुक्म यह है कि जब तक यह ख़्याल हो कि वह शख़्स सामान की तलाश में होगा, उस वक़्त तक उसे तलाश किया जाए, और जब मिलने से मायूसी हो जाए तो उसे सदक़ा कर दिया जाए, या ख़ुद मुस्तहिक़ हो तो उसे इस्तेमाल कर ले। (अहम मसाइल / जि: 4 / पृ: 186)

शम्अ-ए-फ़रोज़ां: दीने हक़ और इब्राहीमी फ़ित्ना
लेख

शम्अ-ए-फ़रोज़ां: दीने हक़ और इब्राहीमी फ़ित्ना

(मुलाख़्ख़स - इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप) अल्लाह तआला ने हर चीज़ के लिए एक मुक़र्रर रास्ता बनाया है। खाना मुँह से मेदे तक जाता है, जहाँ लुआब इसे हज़्म के क़ाबिल बनाता है। साँस नाक से फेफड़ों तक जाती है। अगर कोई इस कुदरती निज़ाम को बदलने की कोशिश करे, जैसे खाना नाक में डाले, तो ज़िंदगी ख़तरे में पड़ जाती...

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