मुहक्कक मसाला

इन मौक़ों पर अज़ान सुन्नत है: फ़र्ज़ नमाज़ के वक़्त, पैदाइश के वक़्त बच्चे के कान में, आग लगने के वक़्त, कुफ़्फ़ार से जंग के वक़्त, मुसाफ़िर को जब शयातीन ज़ाहिर होकर डराएँ, ग़म के वक़्त, ग़ुस्से (ग़ज़ब) के वक़्त, जब मुसाफ़िर रास्ता भूल जाए, जब किसी आदमी या जानवर की बद-ख़ुल्क़ी ज़ाहिर हो तो उसके कान में, और जब किसी को मिर्गी आए। (अहम मसाइल / जिल्द: 6 / सफ़ा: 47)

सहाबा की शान पर एक अनोखा लेख
लेख

सहाबा की शान पर एक अनोखा लेख

लेखक: मुहद्दिस-ए-अस्र अल्लामा सैयद मुहम्मद यूसुफ बनूरी (रहमतुल्लाह अलैह) बात तो बिल्कुल साफ है कि सहाबा (पैगंबर के साथी) जैसे भी हों, मगर वे तुम से तो अच्छे ही होंगे। तुम हवा में उड़ लो, आसमान पर पहुँच जाओ, सौ बार मर कर जी लो, मगर तुम से सहाबी तो नहीं बना जा सकेगा। तुम आखिर वह आँख कहाँ से लाओगे ज...