मुहक्कक मसाला

कुछ लोग खड़े होकर वुज़ू करने को मकरूह समझते हैं, जबकि सही बात यह है कि खड़े होकर वुज़ू करना मकरूह नहीं, बल्कि ख़िलाफ़े-अदब (अदब के ख़िलाफ़) है, क्योंकि फ़ुक़हा-ए-किराम ने ऊँची जगह पर बैठकर वुज़ू करने को वुज़ू के आदाब में शुमार किया है, और अदब की मुख़ालफ़त से कराहत लाज़िम नहीं आती। (अहम मसाइल / जिल्द: 5 / सफ़ा: 67)

एक ही सफ़ (कतार) में खड़े हो गए महमूद व अयाज़ (इस्लामी न्याय की मिसाल)
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एक ही सफ़ (कतार) में खड़े हो गए महमूद व अयाज़ (इस्लामी न्याय की मिसाल)

इमाम अबू यूसुफ (रह.) खलीफा हारून रशीद के ज़माने में पूरे इस्लामी जगत के मुख्य न्यायाधीश (काज़ी-उल-कुज़ात) थे। एक बार उनके पास खलीफा हारून रशीद और एक ईसाई नागरिक का मुकदमा आया। इमाम ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला ईसाई के हक में सुनाया। इस तरह के सुनहरे और रोशन वाकयात इस्लामी इतिहास के प...

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