कुछ लोग मुर्दे को ग़ुस्ल देने से पहले उसके नाख़ून, बाल वग़ैरह काटते हैं। उनका यह अमल मकरूह है, इसलिए इस अमल से एहतराज़ करना (बचना) चाहिए। (अहम मसाइल / जिल्द: 6 / सफ़ा: 102)
"ख़ुदा की क़सम!
अगर आप अहल-ए-ग़ज़ा (ग़ज़ा वासियों) पर ढाए जाने वाले मज़ालिम (अत्याचार) और तकलीफ़ें देखें तो आप दंग रह जाएं, ज़ेहन इस बात को स्वीकार नहीं कर पाएगा कि आख़िर एक इंसान इन तमाम मज़ालिम और तकलीफ़ों को बर्दाश्त करके ज़िंदा कैसे रह सकता है? और इन तकलीफ़ों की शिद्दत (तीव्रता) से उसकी मौत कैसे व...