मुहक्कक मसाला

अगर कोई शख़्स एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक बिना टिकट सफ़र करे, जो जायज़ नहीं है, तो उसे चाहिए कि जितनी दफ़ा उसने बिना टिकट सफ़र किया, उतनी दफ़ा के किराये का हिसाब लगाकर टिकट ख़रीद ले और ज़ाया (नष्ट) कर दे, इस तरह इन शा अल्लाह उसका ज़िम्मा फ़ारिग़ हो जाएगा, क्योंकि इस सूरत में हक़, साहिब-ए-हक़ (हक़दार) को पहुँच जाता है। (अहम मसाइल / जिल्द: 5 / सफ़ा: 232)

तुहफ़तुल हिंद और तक़्वियतुल ईमान: हज़रत मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी की धार्मिक जागृति
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तुहफ़तुल हिंद और तक़्वियतुल ईमान: हज़रत मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी की धार्मिक जागृति

हज़रत मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी लिखते हैं कि: सबसे पहले जिस किताब ने मुझे इस्लाम के बारे में सही जानकारी दी और हिंदू समाज में रहकर मैं सोलह साल की उम्र से पहले मुसलमान हो गया, वह "तुहफ़त-उल-हिन्द" है। तुहफ़त-उल-हिन्द के मेरे हमनाम लेखक ने हिंदू धर्म की बहुदेववादी मान्यताओं और रीति-रिवाजों का वर्णन करन...

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