आजकल बहुत से मुस्लिम नौजवान अपनी कलाई पर काला धागा या ज़ंजीर या कड़ा बांधते और पहनते हैं। अगर इन चीज़ों का पहनना या बांधना किसी ग़लत अक़ीदे पर मबनी (आधारित) है, यानी इनसे फ़ायदा पहुँचता है, तो यह हराम है, और अगर महज़ ज़ीनत (सजावट/दिखावे) के तौर पर है तो यह मकरूह-ए-तहरीमी है। (अहम मसाइल / जिल्द: 1 / सफ़ा: 21)