फ़र्ज़ नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ना मसनून (सुन्नत) है, और अहादीस में इसके बड़े फ़ज़ाइल वारिद हुए हैं। चुनाँचे एक हदीस में है कि जो शख़्स फ़र्ज़ नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़े, वह अगली नमाज़ तक अल्लाह तआला के ज़िम्मे में होता है। इसी तरह एक हदीस में वारिद है कि जो शख़्स फ़र्ज़ नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़े, उसके जन्नत में दाख़िल होने से सिवाए मौत के कोई चीज़ माने (बाधा) नहीं है, यानी वह सीधा जन्नत में दाख़िल होगा। मगर सर पर हाथ रखकर आयतुल कुर्सी पढ़ना मसनून नहीं है, अलबत्ता फ़ि नफ़्सिही (अपने आप में) जायज़ है। (अहम मसाइल / जिल्द: 9 / सफ़ा: 52)