क़ुरआन मजीद के बोसीदा औराक़ कोजलाना दुरुस्त नहीं, बल्कि क़ुरआन करीम के नाक़ाबिले-इन्तिफ़ा नुस्ख़ों को किसी महफ़ूज़ जगह पाक-साफ़ कपड़े में दफ़्न कर देना चाहिए, या इन औराक़ को जारी पानी में डाल देना चाहिए। (अहम मसाइल / जिल्द: 1 / सफ़ा: 134)
यह उस ज़माने की बात है जब दुनिया में बादशाहतें (राजशाही) क़ायम थीं और कई-कई मील पर फैली हुई रियासतों पर विभिन्न ख़ानदानों की हुकूमत हुआ करती थी। इसी दौर के एक बादशाह पर क़ुदरत मेहरबान हुई और उसके एक अक्लमंद वज़ीर और बहादुर सिपाहसालार की बदौलत उसकी सल्तनत वसीअ (विशाल) होती चली गई। इस बादशाह के पड़ोसी...