मुहक्कक मसाला

अगर कोई शख़्स पहली रकअत में ही सूरह नास पढ़ दे, तो उसको चाहिए कि दूसरी रकअत में भी इसी सूरत को पढ़कर नमाज़ पूरी करे। (अहम मसाइल / जिल्द: 6 / सफ़ा: 61)

बिना सोचे-समझे बोले गए शब्दों का ज़हर और रिश्तों की तबाही
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बिना सोचे-समझे बोले गए शब्दों का ज़हर और रिश्तों की तबाही

एक सहेली ने दूसरी सहेली से पूछा, "बच्चा पैदा होने की खुशी में तुम्हारे शौहर (पति) ने तुम्हें क्या तोहफ़ा दिया???" सहेली ने कहा, "कुछ भी नहीं!!!!" उसने सवाल करते हुए पूछा, "क्या यह अच्छी बात है??? क्या उनकी नज़र में तुम्हारी कोई क़ीमत नहीं???" लफ़्ज़ों (शब्दों) का यह ज़हरीला बम गिराकर वह सहे...

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