मुहक्कक मसाला

दाढ़ी रखना इस्लामी और कौमी शिआर, तमाम अम्बिया की सुन्नत, शराफ़त व बुज़ुर्गी की अलामत और चेहरों का जमाल है, इससे मर्दाना शक्ल की तकमील होती है, और छोटे बड़े के दरमियान फ़र्क़ होता है, लिहाज़ा एक मुश्त दाढ़ी रखना वाजिब, और एक मुश्त तक पहुँचने से पहले मुंडवाना, काटना या कटवाना गुनाह-ए-कबीरा है। (अहम मसाइल / जि: 1 / पृ: 147)

एक नौजवान की इस्तिकामत (दृढ़ता)
लेख

एक नौजवान की इस्तिकामत (दृढ़ता)

समरकंद के इसी सफर में एक आलिम एक नौजवान को इस आजिज़ (शेख पीर ज़ुल्फ़िकार अहमद नक़्शबंदी) से मिलाने के लिए लाए और बताया कि यह वह खुश-नसीब नौजवान है जो रूसी इंकलाब (क्रांति) के ज़माने में पांच मर्तबा अज़ान देकर खुलेआम नमाज़ें पढ़ता था। यह सुनकर इस आजिज़ को हैरत हुई और पूछा: "वह कैसे?" उस नौजवान ने अपन...

ट्रेंडिंग न्यूज़

सभी समाचार