मुहक्कक मसाला

बेहतर और मुस्तहब यह है कि हर मर्तबा हुज़ूर अकरम ﷺ का नाम-ए-मुबारक अदा करने वाला और सुनने वाले तमाम अहबाब आप ﷺ पर दुरूद-ओ-सलाम भेजें, लेकिन अगर पूरी मजलिस में बाज़ लोगों ने भी आप का नाम-ए-मुबारक सुन कर "सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम" कह दिया, तो इस सूरत में दीगर के हक़ में इसकी अदायगी साक़ित हो जाती है, जबकि पूरी मजलिस के दौरान आप ﷺ के मुबारक नाम पर, कम अज़ कम एक मर्तबा दुरूद-ओ-सलाम पढ़ना वाजिब है, जिसमें कोताही मोजिब-ए-इक़ाब है। (अहम मसाइल / जि: 10 / पृ: 45)

पिता का शिक्षाप्रद उत्तर
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पिता का शिक्षाप्रद उत्तर

अबुल कलाम कहते हैं: एक रात खाने के समय मेरी माँ ने सालन (सब्ज़ी) और जली हुई रोटी मेरे पिता के आगे रख दी। मैं पिता की प्रतिक्रिया का इंतज़ार करता रहा कि शायद वह ग़ुस्से का इज़हार करेंगे, लेकिन उन्होंने बेहद सुकून से खाना खाया और साथ ही मुझसे पूछा कि आज स्कूल में मेरा दिन कैसा गुज़रा? मुझे याद न...

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