मुहक्कक मसाला

नमाज़-ए-जनाज़ा पढ़ाने की वसीयत करना।

अगर कोई शख़्स अपने औलिया को यह वसीयत कर के मरे कि मेरी नमाज़-ए-जनाज़ा फ़लां शख़्स पढ़ाए, तो उसके औलिया पर इस वसीयत का पूरा करना लाज़िम नहीं है, ताहम अगर औलिया-ए-मय्यित उस फ़लां शख़्स से नमाज़ पढ़वाना चाहें, तो इसमें कोई हरज भी नहीं है। (अहम मसाइल / जि: 9 / पृ: 110)

मोहम्मद नाम के चार खुश-नसीब मुहद्दिसीन: इल्म-ए-हदीस की ख़िदमत का एक हैरतअंगेज़ वाक़या
लेख

मोहम्मद नाम के चार खुश-नसीब मुहद्दिसीन: इल्म-ए-हदीस की ख़िदमत का एक हैरतअंगेज़ वाक़या

तीसरी सदी हिजरी में मिस्र में चार मुहद्दिसीन (हदीस के विद्वान) बहुत मशहूर हुए। चारों का नाम 'मोहम्मद' था, और चारों ही इल्म-ए-हदीस के जलील-उल-क़द्र (महान) अइम्मा (इमामों) में शुमार होते थे। उनमें से एक मोहम्मद बिन नस्र मर्वज़ी (रहमतुल्लाह अलैह) हैं, दूसरे मोहम्मद बिन जरीर तबरी (रहमतुल्लाह अलैह), तीसर...