मुहक्कक मसाला

सत्र खुलने से वज़ू नहीं टूटता

बहुत से हज़रात यह समझते हैं कि अगर सत्र खुल जाए या किसी के सत्र पर नज़र पड़ जाए तो वज़ू टूट जाता है, यह ख़्याल ग़लत है, क्योंकि सत्र खुलना या किसी के सत्र पर नज़र पड़ना नाक़िज़-ए-वज़ू नहीं है। (अहम मसाइल / जि: 2 / पृ: 54)

चौधरी साहब का त्याग और धार्मिक विद्वानों से प्रेम
लेख

चौधरी साहब का त्याग और धार्मिक विद्वानों से प्रेम

...मदरसा के छात्रों के लिए एक चौधरी साल भर का गेहूं मदरसा के लिए वक्फ (दान) करता था। किसी शरारती (द्वेषी) शख्स ने मौलाना साहब के बारे में दुश्मनी और नफरत का इजहार ऐसा किया कि पता मालूम करते-करते चौधरी के घर पहुंच गया और कहने लगा: "चौधरी साहब! मदरसे जाकर पता तो करें कि छात्रों के नाम पर क्या खियान...

ट्रेंडिंग न्यूज़

सभी समाचार