गाली देने से वज़ू नहीं टूटता
बाज़ हज़रात यह समझते हैं कि गाली देने से या खिलखिला कर हंसने से वज़ू टूट जाता है, सो यह ख़्याल ग़लत है, लेकिन गाली देने, ग़ीबत करने और कोई बुरा शेर वग़ैरह पढ़ने के बाद वज़ू करना मुस्तहब है, हाँ रुकू-सज्दा वाली नमाज़ में क़हक़हा लगाने से वज़ू टूट जाता है। (अहम मसाइल / जि: 2 / पृ: 56)