मुहक्कक मसाला

गाली देने से वज़ू नहीं टूटता

बाज़ हज़रात यह समझते हैं कि गाली देने से या खिलखिला कर हंसने से वज़ू टूट जाता है, सो यह ख़्याल ग़लत है, लेकिन गाली देने, ग़ीबत करने और कोई बुरा शेर वग़ैरह पढ़ने के बाद वज़ू करना मुस्तहब है, हाँ रुकू-सज्दा वाली नमाज़ में क़हक़हा लगाने से वज़ू टूट जाता है। (अहम मसाइल / जि: 2 / पृ: 56)

हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी की बेमिसाल इस्तिक़ामत (दृढ़ता)
लेख

हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी की बेमिसाल इस्तिक़ामत (दृढ़ता)

एक बार हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी (रह.) पर ग़द्दारी (राजद्रोह) का मुक़दमा चला और फ़िरंगी (अंग्रेज़) की अदालत हॉल कराची में उनकी पेशी हुई। मौलाना मोहम्मद अली जौहर और बहुत सारे दूसरे अकाबरीन (वरिष्ठ नेता) भी वहाँ जमा थे। फ़िरंगी ने बुलाया और कहा, "हुसैन अहमद! यह जो तुमने फ़तवा दिया है कि अंग्रेज़ की...

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