मसबूक़ का दूसरे के कहने पर बक़िया नमाज़ पूरी करना
मसबूक़ अगर इमाम के साथ सलाम फेर दे, फिर दूसरे के कहने की बिना पर अपनी नमाज़ मुकम्मल करे तो उसकी नमाज़ फ़ासिद हो जाएगी, हाँ अगर सलाम फेरने के बाद याद आ गया (ख़्वाह यह याद आना अपने बाजू में नमाज़ पढ़ने वाले को देख कर ही हो फिर खड़ा हुआ) तो नमाज़ फ़ासिद न होगी। (अहम मसाइल / जि: 2 / पृ: 85)