नमाज़ में सत्र छुपाने की मिक़दार
आदमी का सत्र नाफ़ से लेकर घुटने के नीचे तक है, जिसका नमाज़ में और नमाज़ के बाहर छुपाना वाजिब है, आदमी के सत्र की जो मिक़दार बयान की गई है फ़ुक़हा के नज़दीक यह आठ अज़ा (अंगों) पर मुश्तमिल है, अगर इनमें से किसी एक उज़ू (अंग) का चौथाई हिस्सा एक रुक्न, यानी तीन तस्बीहात पढ़ने की बक़द्र खुला रहा तो नमाज़ फ़ासिद होगी। (अहम मसाइल / जि: 1 / पृ: 34)