मुहक्कक मसाला

गिरी पड़ी चीज़ का उठाना

लु़क़्ता यानी गिरी पड़ी चीज़ किसी शख़्स का वह खोया हुआ माल है जिसे कोई और शख़्स उठा ले। लु़क़्ता का उठाना कभी मुस्तहब होता है, कभी मुबाह और कभी हराम। अगर अंदेशा हो कि न उठाने की सूरत में वह सामान ज़ाया (नष्ट) हो जाएगा, तो असल मालिक तक पहुँचाने की नीयत से उसे उठा लेना मुस्तहब है, बल्कि शवाफ़े (शाफ़ई मज़हब) के नज़दीक वाजिब है। अगर ज़िया (नुक़सान) का अंदेशा न हो तो उसका उठाना मुबाह है, और इस नीयत से उठाना कि वह ख़ुद रख लेगा और असल मालिक तक नहीं पहुँचाएगा, तो यह हराम है, क्योंकि आप ﷺ ने फ़रमाया: "लु़क़्ता यानी गिरी पड़ी चीज़ उठाना उसके लिए हलाल है जो एलान (घोषणा) का इरादा रखता हो।" (अहम मसाइल/जि:१/पृ:१२३)

यौम-ए-आशूरा: इसका महत्व, महानता और 21 ऐतिहासिक घटनाएँ
लेख

यौम-ए-आशूरा: इसका महत्व, महानता और 21 ऐतिहासिक घटनाएँ

यौम-ए-आशूरा बड़ा ही महत्वपूर्ण और महानता का हामिल दिन है, इतिहास की महान घटनाएँ इससे जुड़ी हुई हैं; चुनाँचे इतिहासकारों ने लिखा है कि: (1) यौम-ए-आशूरा में ही आसमान और ज़मीन, क़लम और हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को पैदा किया गया। (2) इसी दिन हज़रत आदम अली नबिय्यिना व अलैहिस्सलातु वस्सलाम की तौबा क़बूल ह...

ट्रेंडिंग न्यूज़

सभी समाचार