गिरी पड़ी चीज़ का उठाना
लु़क़्ता यानी गिरी पड़ी चीज़ किसी शख़्स का वह खोया हुआ माल है जिसे कोई और शख़्स उठा ले। लु़क़्ता का उठाना कभी मुस्तहब होता है, कभी मुबाह और कभी हराम। अगर अंदेशा हो कि न उठाने की सूरत में वह सामान ज़ाया (नष्ट) हो जाएगा, तो असल मालिक तक पहुँचाने की नीयत से उसे उठा लेना मुस्तहब है, बल्कि शवाफ़े (शाफ़ई मज़हब) के नज़दीक वाजिब है। अगर ज़िया (नुक़सान) का अंदेशा न हो तो उसका उठाना मुबाह है, और इस नीयत से उठाना कि वह ख़ुद रख लेगा और असल मालिक तक नहीं पहुँचाएगा, तो यह हराम है, क्योंकि आप ﷺ ने फ़रमाया: "लु़क़्ता यानी गिरी पड़ी चीज़ उठाना उसके लिए हलाल है जो एलान (घोषणा) का इरादा रखता हो।" (अहम मसाइल/जि:१/पृ:१२३)