मुहक्कक मसाला

नमाज़ में कोई वाजिब छूट जाए तो क्या करे?

नमाज़ में कोई वाजिब छूट गया हो और सज्दा-ए-सह्व न किया गया हो, या जो नमाज़ कराहत-ए-तहरीमी के साथ अदा हुई हो, वह वाजिबुल इआदा (दोहराना अनिवार्य) है। मगर इआदा (दोहराने) का यह हुक्म वक़्त के बाक़ी रहने तक ही है। वक़्त के निकल जाने पर इआदा का वुजूब साक़ित हो जाता है (अनिवार्यता ख़त्म हो जाती है)। अब इसकी मकाफ़ात (भरपाई) इस्तिग़फ़ार (क्षमा याचना) के ज़रिए की जाएगी, लेकिन अगर वक़्त निकल जाने के बाद इआदा कर लिया जाए तो अफ़ज़ल (बेहतर) है। (अहम मसाइल/जि:२/पृ:१०५)

एक माँ का अटूट ईमान
लेख

एक माँ का अटूट ईमान

शायर-ए-ख़त्म-ए-नबुव्वत सैय्यद अमीन गीलानी (रहमतुल्लाह अलैह) अपनी जेल का वाक़िया बयान करते हुए कहते हैं: "एक दिन जेल का सिपाही आया और मुझसे कहा कि आपको दफ़्तर में सुपरिंटेंडेंट साहब बुला रहे हैं। मैं दफ़्तर पहुँचा तो देखा कि वालिदा साहिबा (माता जी) मेरी अहलिया (पत्नी) और बेटे सलमान गीलानी के साथ बै...

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