ट्रेन की टंकी का पानी
ट्रेन यानी रेलगाड़ी की टंकी में जो पानी होता है, अगर उसमें औसाफ़-ए-सलासा यानी रंग, बू (गंध) और मज़ा (स्वाद) में से कोई वस्फ़ (गुण) न पाया जाए, तो वह पानी पाक है। उससे वुज़ू और ग़ुस्ल करना दुरुस्त और जायज़ है। तबीई कराहत (प्राकृतिक हिचकिचाहट) की वजह से इसकी पाकी (पवित्रता) में शक न किया जाए। (अहम मसाइल/जि:४/पृ:२८)