"एक मार्गदर्शक (रहमा) शख्सियत से दुनिया महरूम हो गई।
आप एक अज़ीम (महान) अल्लाह वाले, आशिक-ए-रसूल और खिदमत-ए-दीन (धर्म की सेवा) में हमेशा आगे रहने वाले बुज़ुर्ग थे। उम्मत के लिए उनका विसाल (निधन) एक बड़ा दीनी नुक़सान है।
अल्लाह तआला उनके दरजात बुलंद फ़रमाए और हमें उनके नक़्श-ए-क़दम पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।"