"अल्लाह की क़सम! तुम अल्लाह के क़ुर्ब (समीप्य) की बुलंदियों तक नहीं पहुँच सकते जब तक कि अल्लाह तआला तुम्हें हर चीज़ से ज़्यादा महबूब (प्रिय) न हो जाए; और जिसने क़ुरआन मजीद से मोहब्बत की, उसने अल्लाह से मोहब्बत की!"
— मुहद्दिस सुफ़ियान बिन उयैना (रहमतुल्लाही अलैहि)