"अस्सलामू अलैकुम जनाब एडमिन साहब! उम्मीद है आप बखैरियत (सकुश...
Ummah Post
3 June, 2025

"अस्सलामू अलैकुम जनाब एडमिन साहब! उम्मीद है आप बखैरियत (सकुशल) होंगे। आजकल रसाएल (पत्रिकाएं) बहुत कम आ रही हैं; कारईन (पाठक) मुंतज़िर (इंतज़ार में) हैं, खास तौर पर रिज़वान पालनपूरी 😄😄😄😄😄"

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रिश्तेदारी तोड़ने (क़ता-ए-रहमी) का अज़ाब (अल-ज़वाज़िर का एक वाक़िया)
लेख

रिश्तेदारी तोड़ने (क़ता-ए-रहमी) का अज़ाब (अल-ज़वाज़िर का एक वाक़िया)

अल्लामा इब्न-ए-हजर हैतमी रहमतुल्लाही अलैहि की किताब है "अज़-ज़वाज़िर अन इक़्तिराफ़िल कबाइर"। इसमें उन्होंने एक वाक़िया लिखा है: एक शख़्स हज के इरादे से गया और जब हज करने लगा तो उसने मक्का में पूछा कि सबसे अमानतदार शख़्स कौन है? तो बतलाया गया कि फ़लाँ शख़्स है। तो वह उसके पास गया और अपने एक हज़ार दीन...