"जब इंसान अपनी ज़िद, ग़ुरूर (अहंकार) और अना (अहम) के खोल में...
Ummah Post
6 June, 2025

"जब इंसान अपनी ज़िद, ग़ुरूर (अहंकार) और अना (अहम) के खोल में बंद हो जाता है, तो फिर सच्चाई की रोशनी भी उसके दिल तक नहीं पहुँचती। इल्म (ज्ञान) तब ही असर करता है जब दिल झुकने को तैयार हो, और सीखने वाला खुद को खाली महसूस करे। लेकिन जब कोई सिर्फ अपनी बरतरी (श्रेष्ठता) साबित करने पर तुल जाए, तो वह सच को नहीं, सिर्फ अपनी अना (अहंकार) को जिताता है और इस तरह इल्म, अक़्ल और फ़हम (समझ) सब हार जाते हैं।"

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बच्चा गालियाँ कहाँ से सीखता है?
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बच्चा गालियाँ कहाँ से सीखता है?

बच्चा ये گالیاں (गालियाँ) कहाँ से सीखता है? सबसे पहले घर से सीखता है। जो बाप बात-बात पर अपनी बीवी को गाली दे रहा हो, अपने बच्चों को गालियाँ दे रहा हो, दोस्तों के साथ निजी महफ़िल और मोबाइल पर ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहा हो, तो फिर यह बच्चा वालिद (पिता) से सीख रहा होता है। वह समझता है कि गाली देना कोई...