"वक़्त और बख़्त (भाग्य) कभी साथ नहीं चलते, कभी 'वक़्त' हाथ छुड़ा...
Ummah Post
6 June, 2025

"वक़्त और बख़्त (भाग्य) कभी साथ नहीं चलते, कभी 'वक़्त' हाथ छुड़ा लेता है तो कभी 'बख़्त'। अगर इत्तेफाक से दोनों मिल जाएं, तो इंसान की तक़दीर बदल देते हैं।" ✍🏻

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एक ही सफ़ (कतार) में खड़े हो गए महमूद व अयाज़ (इस्लामी न्याय की मिसाल)
लेख

एक ही सफ़ (कतार) में खड़े हो गए महमूद व अयाज़ (इस्लामी न्याय की मिसाल)

इमाम अबू यूसुफ (रह.) खलीफा हारून रशीद के ज़माने में पूरे इस्लामी जगत के मुख्य न्यायाधीश (काज़ी-उल-कुज़ात) थे। एक बार उनके पास खलीफा हारून रशीद और एक ईसाई नागरिक का मुकदमा आया। इमाम ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला ईसाई के हक में सुनाया। इस तरह के सुनहरे और रोशन वाकयात इस्लामी इतिहास के प...