"रिज़्क़ (आजीविका/वरदान) सिर्फ यही नहीं कि जेब में माल (दौलत...
Ummah Post
7 June, 2025

"रिज़्क़ (आजीविका/वरदान) सिर्फ यही नहीं कि जेब में माल (दौलत) हो, बल्कि:

आँखों की रोशनी भी रिज़्क़ है।

दिमाग में ख़याल भी रिज़्क़ है।

दिल का एहसास भी रिज़्क़ है।

रगों में खून भी रिज़्क़ है।

यह ज़िंदगी खुद एक रिज़्क़ है।"

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हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) का एक वाक़या और पिता के मित्रों का सम्मान
लेख

हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) का एक वाक़या और पिता के मित्रों का सम्मान

हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) एक बार सफ़र पर जा रहे थे, ग़ालिबन (शायद) हज या उमरे का सफ़र था। साहिबे-हैसियत (धनी) अरबों की आदत के मुताबिक़, आप सफ़र पर जाते हुए सवारी के ऊँट के साथ एक खच्चर नुमा गधा भी ले गए (अरबों के गधे हमारे यहाँ के गधों की तरह नहीं होते, बल्कि हमारे यहाँ के खच्चर...