"उस आँख में कोई भलाई (खैर) नहीं जो रो न सके, और उस आवाज़ में...
Ummah Post
8 June, 2025

"उस आँख में कोई भलाई (खैर) नहीं जो रो न सके, और उस आवाज़ में कोई अच्छाई नहीं जो अल्लाह के कलाम (क़ुरआन) की तिलावत न करे।"

— शेख समीर मुस्तफा (अल्लाह उन्हें जल्द रिहा फरमाए)

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लेख

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