"जो व्यक्ति छुपकर गुनाह करे, वह चुपके से तौबा (पश्चाताप) करे...
Ummah Post
8 June, 2025

"जो व्यक्ति छुपकर गुनाह करे, वह चुपके से तौबा (पश्चाताप) करे; और जो खुल्लम-खुल्ला ज्यादती (उल्लंघन) करे, वह खुले आम तौबा करे; क्योंकि अल्लाह माफ़ करता है, मलामत (निंदा) नहीं करता; और लोग मलामत करते हैं, माफ़ नहीं करते!"

— इमाम मैमून बिन मेहरान (रहमहुल्लाह)

(अल-बिदाया वन-निहाया: 9/347)

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हज़रत हुसैन (रज़ियल्लाहु अन्हु) और एक देहाती के बीच एक सबक़आमोज़ बातचीत
लेख

हज़रत हुसैन (रज़ियल्लाहु अन्हु) और एक देहाती के बीच एक सबक़आमोज़ बातचीत

एक देहाती (गांववासी) हज़रत हुसैन बिन अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) के पास गया, उनको सलाम किया और उनसे अपनी ज़रूरत (हाजत) पूरी करने का सवाल किया। उसने कहा, "मैंने आपके नाना (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से सुना है, उन्होंने फ़रमाया कि जब तुम किसी से अपनी ज़रूरत का सवाल करो, तो वह चार (सिफ़तों वाले आदमियों) में...