दूसरों को नुकसान पहुँचाए बिना,
उन्हें बदनाम किए बिना,
उनसे हसद (ईर्ष्या) किए बिना,
उनसे उलझे बिना,
> उनसे आगे निकल जाने का हुनर सीखिए।
*وَمِن شَرِِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ•`*
और जब किसी जलने वाले का हौसला/हसद मुझे नुकसान पहुँचाने आए,
तो ऐ अल्लाह, मुझे अपनी पनाह (सुरक्षा) में रखना। आमीन या रब्बल आलमीन।