दूसरों को नुकसान पहुँचाए बिना,
उन्हें बदनाम किए बिना,
उनसे...
Ummah Post
9 June, 2025

दूसरों को नुकसान पहुँचाए बिना,

उन्हें बदनाम किए बिना,

उनसे हसद (ईर्ष्या) किए बिना,

उनसे उलझे बिना,

> उनसे आगे निकल जाने का हुनर सीखिए।

*‏وَمِن شَرِِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ•`*

और जब किसी जलने वाले का हौसला/हसद मुझे नुकसान पहुँचाने आए,

तो ऐ अल्लाह, मुझे अपनी पनाह (सुरक्षा) में रखना। आमीन या रब्बल आलमीन।

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इल्म (ज्ञान) का बदसूरत आशिक़
लेख

इल्म (ज्ञान) का बदसूरत आशिक़

असली नाम अम्र बिन महबूब था, 160 हिजरी में पैदा हुए और 'जाहिज़' के लक़ब (उपाधि) से मशहूर हुए। अरबी में जाहिज़ उसे कहते हैं जिसकी आँखों के ढेले (पुतलियाँ) बाहर की ओर उभरे हुए हों। शुरुआत में वे इस लक़ब को नापसंद करते थे, लेकिन रफ़्ता-रफ़्ता (धीरे-धीरे) ख़ामोश हो गए। शायद ही किसी के रूप-रंग का इस तर...