" لبَّيكَ والقلبُ السَجينُ بَأضلُعِي
يَشتاقُ مَكة و المَآذنَ و الحَرمْ "
"लब्बैक (हाज़िर हूँ ऐ अल्लाह)! और मेरा क़ैदी दिल मेरी पसलियों में बंद है, वह मक्का, मीनारों और हरम की तीव्र तड़प (चाहत) रखता है।"
" لبَّيكَ والقلبُ السَجينُ بَأضلُعِي
يَشتاقُ مَكة و المَآذنَ و الحَرمْ "
"लब्बैक (हाज़िर हूँ ऐ अल्लाह)! और मेरा क़ैदी दिल मेरी पसलियों में बंद है, वह मक्का, मीनारों और हरम की तीव्र तड़प (चाहत) रखता है।"