अपने बच्चों में सख़ावत (उदारता) और हमदर्दी की आदत डालने के लिए उन्हें एक खूबसूरत सा बॉक्स तोहफे में दें, जिस पर बड़े और साफ़ अक्षरों में "सदक़ा" (दान) लिखा हो।
उन्हें नरमी से समझाएं:
"अगर रोज़ाना तुम्हें 10 रुपये मिलते हैं, तो 9 रुपये अपने काम के लिए रखो और 1 रुपया इस 'सदक़ा बॉक्स' में डाल दो। जब यह बॉक्स 10 दिनों में 10 रुपये से भर जाए, तो अपने किसी गरीब या ज़रूरतमंद दोस्त को 10 रुपये की कोई चीज़ खरीद कर दे दो।"
वक़्त के साथ जब उनकी पॉकेट मनी बढ़े, तो उन्हें समझाते रहें कि सदक़े की रक़म भी थोड़ी-थोड़ी बढ़ाते जाएं।
इन्शाअल्लाह! इस अमल (प्रक्रिया) से उनके दिल में दूसरों का दर्द महसूस करने की सलाहियत (क्षमता) पैदा होगी, सख़ावत और हमदर्दी उनकी फ़ितरत (स्वभाव) बन जाएगी, और वे एक संवेदनशील व नेक दिल इंसान बनेंगे।